समुद्र का जल इतना खारा क्यों होता है जबकि उसमे मिलने वाली नदियाँ मीठे जल की होती है ?

समुद्र का जल इतना खारा क्यों होता है जबकि उसमे मिलने वाली नदियाँ मीठे जल की होती है ?

समुद्र में जो नमक है, वह नदियों के द्वारा वहाँ पहुंचाया गया है। जब समुद्र का पानी वाष्पीकृत होता है, तो वह हवा मे उठकर बादल बन जाता है। यही बादल जमीनी इलाकों मे पहुंचकर वर्षा के रूप मे बरसता है। बरसते समय उसका संपर्क हवा मे मौजूद कार्बन डाई आक्साइड, सल्फर डाई आक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड आदि गैसों से होता है। ये गैसें पानी मे घुल जाती है और वर्षा जल को हल्का अम्लीय बना देती है। जब यह अम्लीय जल धरती पर गिरता है, तो वह धरती पर उपलब्ध लवणों को अपने मे विलय कर लेता है। सतह से जब यह पानी बहकर नदियों मे पहुंचता है, तो नदी के पानी मे भी ये लवणांश आ जाता है परंतु इसकी मात्रा बहुत ही कम रहती है इसलिए यह पानी पीने योग्य रहता है। नदियों का यह लवणयुक्त पानी हज़ारों सालों से समुद्र मे बहकर पहुँच रहा है। अतः समुद्र मे बड़ी मात्रा मे नमक इकट्ठा हो गया है।

 

अन्य कारण –

  1. समुद्र की तलहटी मे बड़ी संख्या मे चट्टानें भी मौजूद है और इनमे भी नमक बनने की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। यह नमक भी जल मे घुलकर इसे खारा बनाता है।
  2. समुद्री सतहों मे ज्वालामुखी भी फूटते रहते हैं। इनसे फूटा लावा क्लोरीन, सल्फर डाई आक्साइड आदि गैसें छोड़ता रहता है। समुद्र मे सोडियम आदि पदार्थ भी रहते हैं इनके साथ क्लोरीन की प्रतिक्रिया से लवण बन जाते हैं। जिस नमक को हम खाते हैं, वह सोडियम और क्लोरीन का ही यौगिक है।
  3. समुद्र जल मे मौजूद नमक तो उसी मे रहता है, परंतु सूर्य की गर्मी से उसका जल वाष्पीकृत होकर उससे बाहर जाता रहता है। यही आकाश मे गहराकर बदल बन जाते हैं। वाष्प पूरी तरह से शुद्धतम जल होता है जिसमें तनिक भी नमक नहीं होता है। इस तरह से समुद्र का पानी तो निरंतर चक्रित होता रहता है किन्तु नमक समुद्र मे हो एकत्रित होता रहता है। हज़ारों साल से चल रहीं इस प्रक्रिया के कारण समुद्र का जल खारा हो गया है।

 

उपर्युक्त प्रक्रियाओं के निरंतर चलते रहने से समुद्र का खारापन बढ़ता ही रहता है, ऐसा नहीं है

समुद्र के अंदर ऐसी कई प्रक्रियाएं होती रहती है, जिनके कारण समुद्र जल का नमक समुद्र के तल मे क्षरित भी होता रहता है। इसमे कुछ शल्क-धारी जीव – जंतु भी योगदान करते हैं। ये जीवधारी अपना खोल बनाने के लिए समुद्र जल से नमक लेते है। जब ये मरते है, तो इनका खोल समुद्र के तल में इकट्ठा होने लगता है और बहुत समय बीत जाने पर चूना पत्थर मे बदल जाता है। भू – सतह के हलचल के दौरान चूना पत्थर की पर्तें कहीं से कहीं पहुच जाती है, यानी समुद्र के बाहर भी आजाती है। इनका खनन करके ही हम घर की दीवारों मे लगने वाला चूना पत्थर प्राप्त करते हैं।

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